अभ्यास
आओ आज तुम्हे
बहुत पुरानी कहानी सुनाते है \ उन दिनों स्कूल नहीं होते थे \ स्कूल की जगह
गुरुकुल होते थे \ बच्चे वाही पढ़ने जाते थे \ रार-दिन वाही रहते थे \ पढाई पूरी होने पर घर आते थे \ बीच-बीच में
छुटियाँ होती थी | वंहा गरीब –आमिर सब एक
साथ पढ़ते थे | उन्हें पढ़ने वाले गुरु भी वंही रहते थे |ऐसे ही एक गुरुकुल में बोप
देव रहता था | वह गरीब माँ –बाप का बेटा था |बोप देव जो भी पढता उसे कुछ समझ नहीं
आता था | गणित से बहुत डर लगता था | जो कुछ उसे पढ़ाया जाता वह कुछ नहीं समझ पाता |
उसे डांट पढ़ती वह हर समय सहमा-सहमा रहता | निराश होकर एक रात को उसने गुरुकुल सुबह हो चुकी थी |
गाँव के कुएं पर औरत पानी भर रही
थी | उसने कूए पर जाकर एक ओरत से पानी माँगा छोड़ दिया | चलते –चलते वह एक गाँव में पंहुचा | | औरत ने कुँए में बाल्टी डाली और पानी निकालकर उसे पिलाया उसने पि लिया
| पानी पीते-पीते उसकी आँख कूए के किनारे बने निशानों पर टिक गई | वह कुछ
सोचने लगा | उसे सोचते देख पानी पिलाने
वाली औरत ने सोचा बालक और पानी पीना चाहता है |उसने उसकी तरफ पानी की बाल्टी बढाई
|बोप देव इशारा करके बोला , इन्हें किसने बनाया है औरत हंसी और बोली बेटा तुम बहुत भोले हो | इन्हें
किसी ने नहीं बनाया | यह तो रस्सी के निशान है |
पत्थर पर से रगड़ खाती हुई रस्सी
कूए के अन्दर जाती है और बाहर आती है हजारो बार की रगड़ से ये निशान बने है \ यह सुनते ही वह सोचने लगा , जब रस्सी की रगड़ से
पत्थर में निशान बन गए तो में बार-बार की अभ्यास
से अपना पाठ याद क्यों नहीं कर
सकता मैं अब गणित का सवाल बार- बार हल करूँगा
जो नहीं समझ आएगा ,उसका तब तक अभ्यास करूँगा जब तक वह समझ में ना आए बोप
देव गुरुकुल में वापस लौट आया |वह अभ्यास करने लगा | वही बोप देव बाद में बहुत बड़ा
बिदवान बना |\
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