दो तोते

 

दो तोते



एक राजा जंगल में शिकार खेलने गया | शिकार खेलते- खेलते वह रास्ता भटक गया | वह भटकता - भटकता एक गुफा के पास पहुंचा | वहां आम का एक पेड़ था | उस पेड़ पर एक तोता बैठा था | वह राजा को देखती ही जोर- जोर से चिल्लाने लगा , लूटो ,मारो ,काटो,पितो...

लूटो ,मारो, काटो, पीटो| राजा वह नही रुका | तोता थोड़ी दूर तक राजा का पीछा करता रहा | वह बार- बार कहता रहा , लूटो मारो, काटो ,पीटो| राजा की समझ में कुछ नही आया |

                                                        वह चलते –चलते एक झोपड़ी के पास पहुंचा |झोपड़ी के चारो ओर पेड़ थे | एक पेड़ पर तोता बैठा था | राजा को देखती ही वह मीठी आवाज में कहने लगा , आओ  बैठो ,पानी पीओ ,खाना खाओ | तोते की आवाज सुनकर झोपड़ी में से एक साधू बाहर आया |राजा ने साधू को नमस्कार किया | उसने राजा को चारपाई  पर बैठने को कहा | राजा चारपाई पर बैठ गया | उसे सोच में पडा देख साधू ने पूछा , आप क्या सोच रहे हैं, राजा बोला “ मैंने आज दो तोते देखे | दोनों अगल – अलग  बोली बोलते हैं | थोड़ी दूर पर एक तोता मिला | मुझे देखते ही  कहने लगा , लूटो , मारो , काटो , पितो | एक तोता यहाँ मिला | मुझे देखते ही बोला , आओ, बैठो, पानी पीओ, खाना खाओ | मैं यह भेद नही समझ पाया |

                              राजा की यह बात सुनकर साधू मुस्कुराए| वह बोले यह सब संगती का असर है, दोनों की माँ एक है | पहले  दोनों मेरे पास थे | एक को डाकू ले गये | अब वह उसके पास है , उसकी बोली बोलता है | दूसरा मेरे पास रहता है , वह मेरे पास रहता है | वह मेरी बोली बोलता हैं यह सुनकर राजा बोला , मैं आज समझा, अच्छी संगति का फल अच्छा होता हैं |  (नीलू कुमारी )

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