चतुराई का फल

 

चतुराई का फल

एक किसान था | उसके घर के घर के पास ही एक बंजर जमीन थी | उसे उस जमीन की खुदाई की चिंता थी |



                       एक रात वह किसान अपनी पत्नी से बातें कर रहा था | उसी समय घर के पिछवाड़े कुछ आहट हुई | किसान की पत्नी ने कहा ,” लगता है चोर घर में घुसने के फ़िराक में है | किसान की पत्नी का अनुमान सही था | चार चोर घर में घुसने की कोशिश कर रहे थे | किसान घबरा गया पर किसान की पत्नी बहुत चतुर थी | वह जोर से बोली, “ अरे डरने की जरुरत नही है | मैंने रूपये और गहने पास वाली बंजर जमींन में गाड दिए है | किसान की पत्नी की बात चोरो सुनी | उन्होंने सोचा की अब घर में घसना बेकार है | सीधे उस बंजर जमीन पर गए और जमींन खोदने लगे | उन्होंने पुरे जमींन को गहराई तक खोद डाला पर उन्हें एक फूटी कौड़ी भी नही मिली |अंत में थककर वे चले गए | दुसरे दिन सुबह किसान ने देखा की उसकी बंजर जमीन अच्छी तरह खुदी पड़ी है | वह अपनी पत्नी की चतुराई पर फुले न समाया |

सीख:- चतुराई से काम लिया जाये तो बड़े से बड़ा संकट टल सकता है |

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